संकट के समय सियासत नहीं साथ की भी होती है जरूरत::: थाईलैंड जैसी ही है सिलक्यारा की घटना, ‘थाम लुआंग नांग नॉन’ गुफा में 18 दिन तक चला था रेस्क्यू* *बचाव एजेंसियों ने जूनियर फुटबॉल टीम के 13 सदस्यों की बचाई थी जान

*थाईलैंड जैसी ही है सिलक्यारा की घटना*

*‘थाम लुआंग नांग नॉन’ गुफा में 18 दिन तक चला था रेस्क्यू*

*बचाव एजेंसियों ने जूनियर फुटबॉल टीम के 13 सदस्यों की बचाई थी जान*

*रेस्क्यू के दौरान एकजुट रहा पूरा देश, एक-दूसरे का बढ़ाते रहे हौसला*

*देशवासियों का समर्पण देख वैश्विक अभियान में तब्दील हो गया था बचाव कार्य*

*विपक्ष और सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें पोस्ट करने वालों को लेनी होगी सीख*

देहरादून। सिलक्यारा सुरंग मामला अब देश ही नहीं विदेश में भी सुर्खियों में है। कई देशों के विशेषज्ञ टनल में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अपने सुझाव दे रहे हैं और मदद की पेशकश भी कर रहे हैं। ऐसी ही एक घटना आज से पांच साल पहले थाईलैंड में हुई थी जहां जूनियर फुटबॉल टीम के 13 सदस्य एक गुफा में फंस गए थे। समूचे थाईलैंड ने एकीकृत प्रतिक्रिया दिखाई। आपदा में सियासत को दूर रखा गया। सोशल मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ हौसलाफजाई के लिए किया गया। पूरा देश एकजुट रहा। धैर्य से काम लिया गया। नतीजा यह हुआ कि यह बचाव अभियान वैश्विक हो गया और 18 दिन के रेस्क्यू के बाद टीम के सभी सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

घटना 23 जून 2018 की है। थाईलैंड के चियांग राय प्रांत में ‘थाम लुआंग नांग नॉन’ नाम की कई किलोमीटर लम्बी एक प्रसिद्ध गुफा (कृत्रिम) है। 11 से 16 वर्ष की आयु की टीम के बारह सदस्य और उनके 25 वर्षीय सहायक कोच ने अभ्यास सत्र के बाद 23 जून को गुफा में प्रवेश किया। उनके प्रवेश करने के कुछ ही समय बाद अचानक भारी वर्षा शुरू हो गई और गुफा में बाढ़ की स्थिति बन गई, जिससे उनका बाहर निकलने का रास्ता अवरुद्ध हो गया और वे अंदर ही फंस गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद वहां की सरकार ने त्वरित बचाव और राहत कार्य शुरू कर दिया। बढ़ते जल स्तर और तेज़ धाराओं के कारण समूह का पता लगाने के प्रयासों में बाधा आ रही थी। दिन रात की गई कोशिशों के बाद लगभग एक सप्ताह में गुफा के भीतर फंसे टीम के सदस्यों से सम्पर्क हो पाया। संदेश मिला कि सभी सुरक्षित हैं। फिर तो सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ गई। बचाव में जुटी एजेंसियों पहले से ज्यादा मनोबल के साथ रेस्क्यू में जुट गईं। पूरा देश प्रार्थना करने लगा। सभी एक दूसरे का हौसला बढ़ाने लगे। दुनिया के कई देश मद्द के लिए आगे आए और बचाव कार्य एक बड़े अभियान में तब्दील हो गया। यह तभी संभव हुआ जब पूरे थाईलैंड देश में आपदा के वक्त एकीकृत प्रतिक्रया देखने को मिली। संकीर्ण मार्गों और गंदे पानी के बीच आगे बढ़ने के बाद, ब्रिटिश गोताखोर जॉन वोलान्थेन और रिक स्टैंटन की अगुवाई वाले दल ने गुफा के मुहाने से लगभग 4 किलोमीटर (2.5 मील) दूर एक ऊंची चट्टान पर टीम के सभी 13 सदस्यों को जीवित पाया। 18 दिन तक लगातार चला यह अभियान आखिरकार सफल हुआ। बचाव कार्य में 10,000 से अधिक लोग शामिल थे, जिनमें 100 से अधिक गोताखोर, कई बचावकर्मी, लगभग 100 सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधि, 900 पुलिस अधिकारी और 2,000 सैनिक शामिल थे। दस पुलिस हेलीकॉप्टर, सात एम्बुलेंस और 700 से अधिक गोताखोरी सिलेंडर का उपयोग इस अभियान में किया गया। गुफा से एक अरब लीटर से अधिक पानी निकाला गया, तब जाकर अभियान सफल हो पाया।

कमोवेश यही स्थिति सिलक्यारा मामले में है। भौगोलिक परिस्थितयां भी मिलती जुलती हैं। यहां सकून की बात यह है कि सुरंग में फंसे सभी श्रमिक ठीक हैं और पाइप के जरिए उन्हें लगातार खाद्य पदार्थ और पानी पहुंचाया जा रहा है। सुरंग में जलभराव भी नहीं है इसलिए थाईलैंड की अपेक्षा सिलक्यारा में श्रमिकों को जान का खतरा कम है। जरूरत एकजुट रहने और मनोबल ऊंचा रखने की है। धैर्य की भी आवश्यकता है। खासतौर पर ऐसे वक्त सभी को राजनीति से दूर रहना होगा।

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